वृद्धावस्था में मानवाधिकार भी एक सार्वभौमिक गारंटी है।

जब मौलिक अधिकारों की बात आती है, तो आयु उनकी पूर्ति पर कोई सीमाएँ नहीं लगाती। यह स्पष्ट है कि प्रत्येक मानव को समूह की परवाह किए बिना समान अधिकार प्राप्त हैं।

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